इस राह में किसी को साथी नहीं मिलते
अकेले ही चलना है मुझे
यहाँ हमसफ़र नही मिलते
राह में मयखाने भी मिलेंगे
पर अपना जाम ख़ुद भरना
यहाँ साकी नही मिलते
लोग हसेंगे तुझ पे
कोई हाथ ना बढ़ाएगा
यहाँ किसी को सहारे नही मिलते
ये तन्ज़ीम है बहरों की
यहाँ चिल्लाना मना है
यहाँ ज़ख्मों को मरहम नहीं मिलते
बड़ी पेशोपश है इस राह में
मसीहा तो मिलेंगे कई, पर
यहाँ इंसान नहीं मिलते
बड़ी अजीब सी दुनिया है ये
बैठे हैं कई संगतराश
पर यहाँ बनाने को चेहरे ही नहीं मिलते...
Saturday, October 11, 2008
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2 comments:
amen. brilliant stuff dude.
मसीहा तो मिलेंगे कई, पर
यहाँ इंसान नहीं मिलते.. wah wah :D
thank you guru...
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