आज कोई शायरी नही
लफ्ज़ नही मिल रहे
कलम चल रही है ख़ुद
हाथ नही थम रहे...
आज दिमाग पर मेरे
दिल हावी हो गया
सोचना चाहता हूँ पर
ख्याल नही मिल रहे...
अजीब सी हालत है मेरी
कुछ समझ ना आ रहा
जवाब तो सामने है पर
सवाल नही मिल रहे...
आज समझ आने लगा
ज़िन्दगी का फलसफा
क्या खोया क्या पाया
हिसाब नही मिल रहे...
Saturday, October 11, 2008
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1 comment:
first poem about writer's block! :D
hey.. nice start be.. mast likhta hai saale. keep it up.
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